कहीं आपके घुटनों में भी दर्द तो नहीं


By: Admin on: Friday,29 September 2017|16:18:50



कहीं आपके घुटनों में भी दर्द तो नहीं


जिन्दगी की भागदौड़ में घुटने कमजोर पड़ जाते हैं, इसलिए चलते-फिरते और यहां तक कि आराम के वक्त भी इनकी सेहत का ध्यान रखना न भूलें। घुटनों ने अगर दर्द, सूजन या टेढ़ेपन जैसा कोई संकेत दिया है तो इसे नजरअंदाज न करें। दवाई, व्यायाम और नी रिप्लेसमेंट जैसे विकल्प आपके घुटनों की उम्र बढ़ा सकते हैं। 
कया आप सीढ़ियां चढ़ते है तो घुटनों में हल्का-हल्का दर्द होता है। कई लोगों को लगता है कि शायद ऑफिस में बैठे रहने के कारण हो रहा है। कुछ लोग सुबह उठ कर सैर करना और जिम जाना शुरू कर देते हैं। बल्कि व्यायाम करना भी दोगुना कर देते हैं, लेकिन इससे परेशानी कम होने के बजाय दोगुनी हो जाती है। डॉक्टर से मिलते हैं तो पता चलता है कि रुमेटॉयड अर्थराइटिस के कारण घुटने जवाब दे रहे हैं। जब घुटनों को समझना और उनकी केयर करनी थी, तब उनके साथ अत्याचार किया- यह व्यथा आज हर युवा व्यक्ति की है। वैसे यह आप, हम या किसी के साथ भी हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार इन दिनों मेट्रो शहरों के लोगों को ज्यादातर बीमारियां तय आयु से 20 साल पहले मिलने लगी हैं। इसके पीछे की वजह शहरों का लाइफस्टाइल भी है। आज से बीस साल पहले अर्थराइटिस को बुढ़ापे की बीमारी कहा जाता था। यह 60 साल के बाद घुटनों को पकड़ती थी, लेकिन अब यह समस्या भी 20 साल पहले होने लगी है। एक रिपोर्ट के अनुसार युवा पीढ़ी (30-40 आयु वर्ग) का एक प्रतिशत (100 में एक युवा) घुटनों की समस्या से जूझने लगा है। विशेषज्ञ अनियमित जीवनशैली को इसका एक बड़ा कारण मानते हैं।
दर्द को नजरअंदाज न करें
यदि थोड़ा-सा चलने के बाद घुटनों में दर्द होता है या कुर्सी में बैठ कर भी असहज महसूस कर रहे हैं, सीढ़ी चढ़ने, पालथी मार कर बैठने में दिक्कत होती है तो इस दर्द को समझने की कोशिश करें। किसी हड्डी रोग विशेषज्ञ से तुरंत सलाह लें। अगर घुटनों में किसी प्रकार की चोट लगी है। तो भी सावधान रहने की जरूरत है।


अधिक व्यायाम से परहेज करेंः
कई व्यायाम करना सेहत के लिए बहुत जरूरी होता है पर बात जब घुटनों के दर्द की आये तो हमे सावधान हो जाना चाहिए। कई बार ऐसा होता है कि जब हमारे घुटनों में हम दर्द महसूस करते हैं तो एक्सरसाइज करना शुरू कर देते हैं। हमें ऐसा लगता है कि कसरत करने से दर्द कम होगा। ऐसी स्थिति में हम अपने घुटनों से और ज्यादा काम लेने लगते हैं। उन्हें लगता है कि शायद व्यायाम करने से यह दर्द कम हो जाएगा, लेकिन यह धारणा केवल कल्पना भर है,और नुकसानदायक भी। अगर घुटनों में दर्द शुरू हो गया है तो इसका मतलब है कि आपके घुटनों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है। इनमें उम्रदराज बदलाव (डीजेनरेशन) शुरू हो गए हैं। चिकनाई (ल्यूब्रिकेशन) की कमी होने से हड्डियों के बीच ब्रीदिंग स्पेस घट गया है और ऐसे में अगर आप इनसे ज्यादा मेहनत लेते हैं तो कार्टिलेज (हड्डी के ऊपर चढ़ा हुआ रबरनुमा कवर) घिसने का डर रहता है। ऐसी स्थिति में घुटनों को आराम देने की जरूर होती है।
युवाओं के घुटनों में बढ़ रही है समस्याः
घुटने के जोड़ शरीर की काइनेटिक चेन के मुख्य हिस्से की भूमिका निभाते हैं। ये हिप (कूल्हे) और एंकल (टखने) को एक-दूसरे से जोड़ते हैं। अक्सर घुटनों की समस्या औसत 60 बर्ष की आयु में आती है, लेकिन अब युवाओं में भी यह परेशानी बढ़ रही है। मुश्किल यह है कि शुरुआत में कोई खास लक्षण नजर नहीं आते, न ही किसी प्रकार का तीव्र दर्द या कोई सूजन दिखाई देती है। थोड़ा सा दर्द और असहजता ही होती है। परन्तु इस तरफ किसी का ध्यान नहीं जाता है। हर व्यक्ति यह मानता है की अभी तो मेरी उम्र कम है तो मुझे कोई समस्या नहीं हो सकती। किन्तु इस खतरे की घंटी को समझना जरूरी है। यदि आप समय रहते इस पर जागरूक हो गए तो आप इस समस्या से बच सकते हैं।
घुटने की जाँच स्वयं कैसे करें:
घुटनों की समस्या पहचानने के लिए शीशे के समाने नंगे पैर खड़े हो जाएं। अब अपने घुटनों की तरफ ध्यान से देखें। सहज तरीके से खड़ा होना है। पैरों में खिंचाव न लाएं। फिर एक ब्लैक मार्कर पेन से घुटनों के एकदम बीचो-बीच और टखने के जोड़ के बीच बिंदु लगा कर एक रेखा खीचें। अगर यह लाइन पूरी तरह सीधी है तो समझिए घुटनों की कोई समस्या नहीं है। यदि लाइन में कुछ टेढ़ापन है तो समझिये कुछ समस्या है। यह आपको शीशे के सामने ही कुछ कदम चलने पर पता चल जाएगा। थोड़ा सा चलते ही यह रेखा थोड़ी टेढ़ी नजर आएगी।
पुरुषों की बजाए महिलाओं में ज्यादाः
महिलाओं और पुरुषों के घुटनों के जोड़ एक से ही होते हैं। परन्तु आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं में घुटनों के दर्द की समस्या, पुरुषों की अपेक्षा ज्यादा होती है। इसकी एक वजह महिलाओं का बढ़ता वजन, कमर के घेरे का बड़ा होना और पैरों पर अधिक वसा चढ़ जाना है। इसके अलावा दूसरी वजह महिलाओं में मासिक धर्म के दौरान होने वाले शारीरिक व हॉर्मोनल बदलाव भी हैं। हमारे देश में वैसे भी औसत 70 महिलाओं में खून की कमी के कारण कई अन्य बिमारियों का सामना करना पड़ता है। महिलाओं के पोषण पर हमारा ध्यान बहुत कम रहता है। महिलाओं को सही पोषण देना चाहिए तथा अपने वजन पर भी नियंत्रण रखना चाहिए। सुबह पैदल चलना व नियमित व्यायाम भी महिलाओं के लिए जरूरी है। अध्ययन के अनुसार भारत में 50 बर्ष से अधिक उम्र की हर दूसरी महिला घुटनों की समस्या से परेशान हैं। इस अध्ययन में यह सामने आया कि ये महिलाएं किसी न किसी कारण से घुटनों के दर्द से परेशान हैं। इसकी वजह घुटनों में किसी प्रकार की चोट, मोटापा या रेडियोग्राफिक ऑस्टियो अर्थराइटिस होता है। जिनका (ठडप्) यानी मोटापा अधिक है, उनमें घुटनों के दर्द की शिकायत ज्यादा रहती है। समय पर ध्यान नहीं तो करवाना पड़ता है नी-रिप्लेसमेंट घुटनों में अर्थराइटिस होने से कई बार विकलांगता की स्थिति तक आ जाती है। जैसे-जैसे घुटने जवाब देने लगते हैं, चलना-फिरना, उठना-बैठना, यहां तक कि बिस्तर से उठ पाना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति में नी-रिप्लेसमेंट एक विकल्प के तौर पर मौजूद है। (दिल्ली के दीन दयाल उपाध्यय अस्पताल के डॉक्टर के अनुसार) दोनों घुटनों का नी-रिप्लेसमेंट लगभग तीन घंटे के ऑपरेशन की प्रक्रिया है। इसमें जांघ वाली हड्डी, जो घुटने के पास जुड़ती है और घुटने को जोड़ने वाली पैर वाली हड्डी, दोनों के कार्टिलेज काट कर उच्चस्तरीय तकनीक से प्लास्टिक फिट किया जाता है। कुछ समय में ही दोनों हड्डियों की ऊपरी परत एकदम चिकनी हो जाती है और मरीज चलना फिरना शुरू कर देता है। साधारणतया मरीज ऑपरेशन के दो दिन में ही सहारे से चलने लगता है। फिर 20-25 दिन में सीढ़ी भी चढ़ना शुरू कर देता है। प्राइवेट अस्पताल में नी रिप्लेसमेंट में साढ़े तीन से साढ़े चार लाख और सरकारी में लगभग दो लाख रुपये तक खर्च आता है। यदि समय रहते घुटनों पर होने वाले दर्द को समझ लिया जाये तो आपके पैसे के साथ साथ आपका घुटना भी बच सकता है
व्यायाम से भी हो सकता है बचाव:
यूं तो अर्थराइटिस की बड़ी वजह जेनेटिक (पैदाइशी) होती है, लेकिन आजकल खराब लाइफस्टाइल भी इस बीमारी को जन्म दे रहा है। यदि आप हमेशा अपने घुटनों के लिए सचेत रहें तो यह समस्या पैदा नहीं होगी। छोटी-मोटी आंतरिक चोटें, जो युवावस्था में लगती है, वे भी आगे चल कर अर्थराइटिस की वजह बन सकती हैं। अर्थराइटिस की शिकायत होने पर घुटनों से संबंधित व्यायाम, इस प्रकार हैं
1. जमीन पर सीधे लेट कर एक तरफ करवट लें। फिर उसी तरफ अपने घुटनों को 90 डिग्री पर मोड़ें। ध्यान रखें कि आपके टखने न मुड़ें। अब पैरों को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं। दोनों करवटों पर यह 15-20 बार दोहराएं।
2. पीठ के बल जमीन पर लेटें। अपना एक पैर कुर्सी पर रखें। घुटनों को 90 डिग्री पर झुकाएं। फिर तीन-तीन मिनट के अंतराल में ठीक इसी तरह की मुद्रा को दूसरे पैर से दोहराएं। घुटनों के बाहरी रोटेशन को सुधारने के लिए यह एक्सरसाइज सबसे फायदेमंद है। व्यायाम करते समय झटके से पैर को जमीन से न उठाएं और न रखें। इससे मांसपेशियां क्षतिग्रस्त होने की आशंका बढ़ जाती है।





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